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रामहिं सुमिरत रन भिरत देत परत गुरू पायँ
तुलसी जिन्हहि न पुलक तनु ते जग जीवत जायँ
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Tulsidasतुलसी हरि अपमान तें होइ अकाज समाज
राज करत रज मिलि गए सदल सकुल कुरूराज
Tulsidas was a Hindu poet-saint from the Ramanandi Sampradaya, best known as the author of the Ramcharitmanas.
रामहिं सुमिरत रन भिरत देत परत गुरू पायँ
तुलसी जिन्हहि न पुलक तनु ते जग जीवत जायँ
जीव सीव सम सुख सयन सपनें कछु करतूति
जागत दीन मलीन सोइ बिकल बिषाद बिभूति
एक भरोसो एक बल एक आस बिस्वास
एक राम घन स्याम हित चातक तुलसीदास
सीय सुमित्रा सुवन गति भरत सनेह सुभाउ
काहिबे को सारद सरस जनिबे को रघुराउ
श्री चित्रकूट सब िदन बसत प्रभु सिय लखन समेत
राम नाम जप जापकहि तुलसी अभिमत देत
माया जीव सुभाव गुन काल करम महदादि
ईस अंक तें बढ़त सब ईस अंक बिनु बादि
दुख में सुमरिन सब करे, सुख में करे न कोय ।
जो सुख में सुमरिन करे, दुख काहे को होय
जिहिं हिरदै हरि आइया, सो क्यूं छाना होइ ।
जतन-जतन करि दाबिये, तऊ उजाला सोइ
फूटी आँख विवेक की, लखे ना सन्त असन्त ।
जाके संग दस-बीस हैं, ताको नाम महन्त
हरि संगत शीतल भया, मिटी मोह की ताप ।
निशिवासर सुख निधि, लहा अन्न प्रगटा आप
दाया कौन पर कीजिये, का पर निर्दय होय ।
सांई के सब जीव है, कीरी कुंजर दोय
मार्ग चलते जो गिरा, ताकों नाहि दोष ।
यह कबिरा बैठा रहे, तो सिर करड़े दोष