Doha
एक भरोसो एक बल एक आस बिस्वास
एक राम घन स्याम हित चातक तुलसीदास
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Tulsidaspoet · 1532–1623
Tulsidas was a Hindu poet-saint from the Ramanandi Sampradaya, best known as the author of the Ramcharitmanas.
एक भरोसो एक बल एक आस बिस्वास
एक राम घन स्याम हित चातक तुलसीदास
दिएँ पीठि पाछें लगै सनमुख होत पराइ
तुलसी संपति छाँह ज्यों लखि दिन बैठि गँवाइ
तुलसी श्रीरघुबीर तजि करै भरोसो और
सुख संपति की का चली नरकहुँ नाहीं ठौर
बाहु बिटप सुख बिहँग थलु लगी कुपीर कुआगि
राम कृपा जल सींचिऐ बेगि दीन हित लागि
ब्यापि रहेउ संसार महुँ माया कटक प्रचंड
सेनापति कामादि भट दंभ कपट पाषंड
काम क्रोध लोभादि मद प्रबल मोह कै धारि
तिन्ह महँ अति दाश्न दुखद मायारूपी नारि
सकल काज सुभ समउ भल सगुन सुमंगल जानु
कीरति बिजय बिभूति भलि हियँ हनुमानहि आनु
नाम राम केा अंक है सब साधन हैं सून
अंक गएँ कछु हाथ नहिं अंक रहें दस गून
सोई सेंवर तेइ सुवा सेवत सदा बसंत
तुलसी महिमा मोह की सुनत सराहत संत
तिल पर राखेउ सकल जग बिदित बिलोकत लोग
तुलसी महिमा राम की कौन जानिबे जोग
संपति चकई भरत चक मुनि आयस खेलवार
तेहि निसि आश्रम पिंजाराँ राखे भा भिनुसार
जीव सीव सम सुख सयन सपनें कछु करतूति
जागत दीन मलीन सोइ बिकल बिषाद बिभूति